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Showing posts from October, 2018

दुनिया का अग्रणी समाज

राजपूत समाज दुनिया मे सबसे अग्रणी समाज। जिसकी जुबान और मर्यादा की दुनिया मे इज्जत। वो समाज आज अपने हक्क और हकूक के लिए क्यो चिंतित हैं। क्या कारण हैं। राजपूत को कोई तोड़ सके ये किसी मे जोर नही। सिर्फ राजपूत ही राजपूत को तोड़ने और गिराने में लगा हुआ हैं।   राजपूत ही राजपूत को मिटाने में लगा हैं। एक मुहावरा सत्य है।"लोहा ही लोहे को काटता हैं।    राजपूत को अब किसी भी दिशा और दशा में समाज को टूटने से बचाना होगा।

समाज सुधार नियम।

अब राजपूत समाज को सिर्फ और सिर्फ खानपान, रहनसहन,मर्यादा संस्कार और विचारों व अपनी महफ़िलो में।शराब और मांस को बंद करना होगा। कुलदेवी और कुलदेव के साथ सतियो और भोमियो के साथ झुंझरो को रीति और नीतियों से पूजन करना जरूरी हैं। राजपूत समाज को अब घमंड और अहम को किनारे रख कर अपने समाज को सिचना होगा। कभी भी अपने समाज को टूटने वाली गतिविधि न करे।

दो बिन्दुओ के बीच पिस्ता राजपूत

इतिहास के पन्नो में राजपूत का मतलब एक निडर,सक्षम, और संस्कारी,त्याग और रक्षा की दीवार कही जाने वाली जाति। जिसका वजूद अपने आप मे अहमियत रखने वाला और जिसका अपना सर्विनम इतिहास।      इस समाज के महापुरुषों ने अपने त्याग और बलिदान के लिए इतिहस में आज भी जिनका नाम दर्ज हैं। जबतक राजपूत जुबान में स्वाद और संस्कार में सक्षम था तब तक तो 36 कौम  इज्जत करती थी। महिलाओं की इज्जत,गाय और कमजोर के लिए राजपूत अपना सर कलम करवाने और युद्ध लड़ने से भी चूकते थे। लेकिन धीरे धीरे राजपूत समाज मे कुरीतियो को परोषा गया और राजपूत बुद्धि और विचारों और संस्कारों को भुलाकर खानपान और संस्कारों से गिरने लगा।  शराब और मांस राजपूत समाज का मुख्य हिस्सा बनता गया और जो जातीय और लोग राजपूतो को महान समझते थे वो अब राजपूतो को अय्यास और शराबी और मांसाहारी समझने लगे। राजपूती मर्यादा का पतन होने लगा।   मुगल किसी भी तरह राजपूत समाज को शराब और मांस डुबो देना चाहते थे और धीरे धीरे वही हुआ। राजपूत अपनी आन बान और शान के लिए शराब और मांस को मुख्य मानने लगा। मांस और शराब राजपूतो के घरों की शोभा में शाम...

नॉकरी समाज के लिए अभिशाप

नॉकरी करने वाले समाज के लिए अभिशाप। नॉकरी लगने वाला समाज को किया देता हैं। कुरीतियां। जिसका भुगतान समाज को भुगतना पड़ता हैं।    समाज ने सदियों से रूढ़िवादी नीतियों और कुरीतियों का सामना किया जिसका कारण गलत नीतियां और धारणाएं हैं।हैं। समाज स्वयं एक शब्द जो कभी अपने आप अपना भला नही कर सकता। समाज कोई नई संस्था नही हैं। लेकिन समाज को कौन सुधारेग। समाज की जितनी भी संस्थाए हैं। उनका निर्माण ज्यादतर राजनैतिक पहुंच बनाने और पद रुतबा बनाने के लिए काम मे लिया जाता हैं।   जब तक किसी भी सामाजिक संस्था का मुख्य मकसद समाज का हित और भला करने का नही हैं। समाज का सुधार नही हो सकता। समाज आज सहायता मांग रहा हैं। लेकिन समाज के पथ प्रदशक समाज को सिर्फ और सिर्फ राजनैतिक पहुंच के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।    मैने बचपन से लेकर आज तक समाज हित को महत्व दिया । जिसका खामियाजा मैने समाज में कई बार मह्सुश किया हैं। मैने ज्यादातर राजपूत नेताओ और समाज सेवा करने वाले समाज के नेताओ को सिर्फ एक ही रूप में पाया कि समाज का इस्तेमाल कहा कर सकते।   समाज के नेताओ ने आज तक समाज सेवा नही समाज का ...

राजपूत समाज के विकास व पतन के बिंदु।

"राजपूत नव निर्माण फाउंडेशन" जो की राजपूत समाज के विकास में कार्य कर रहा हैं। राजपूत समाज आज विकसा के साथ कुछ रूढ़िवादी विचारधाराओं से अभी भी उभर नही पाया हैं।     समाज मे कई विचार धाराएं हैं। जिसमे कुछ अत्यंत आवश्यक हैं। तो कुछ विचारधारा समाज को कलंकित कर रही हैं। और कलंकित करती जा रही हैं।    राजपूत समाज का अपना इतिहास रहा हैं। लेकिन आज राजपूत समाज एक बुरे दौर से गुजर रहा हैं। आज जो समाज सदियों से राज करने के साथ 36 कौम का रखवाला बनकर इतिहास में और अपना कार्य करता रहा लेकिन आज समय ऐसा आ गया हैं। कि समाज अपने आप स्वयम के बीच ऊंच नीच की लकीर खींच रहा हैं। जो कि वास्तविक रूप से समाज का पतन हैं।   समाज मे सबसे बड़ा काला सच आज भी हैं। सबसे बड़ा काला सच हैं। दहेज प्रथा। समाज आज भी दो वर्गों में बंटा हुआ हैं। जिसमे ऊंचे राजपूत,रियासती राजपूत,धनपति राजपूत,समाज के अमीर राजपूत और समाज को अपने गुमान और रुतबे से बया करने वाला राजपूत।  आज अगर कोई राजपूत नैतिक और सच्चई के साथ चलते हुए अगर समाज मे अपना जीवन जी रहा हैं। तो उसको समाज हैय दृष्टि से देखता हैं।   नोक...