इतिहास के पन्नो में राजपूत का मतलब एक निडर,सक्षम, और संस्कारी,त्याग और रक्षा की दीवार कही जाने वाली जाति। जिसका वजूद अपने आप मे अहमियत रखने वाला और जिसका अपना सर्विनम इतिहास। इस समाज के महापुरुषों ने अपने त्याग और बलिदान के लिए इतिहस में आज भी जिनका नाम दर्ज हैं। जबतक राजपूत जुबान में स्वाद और संस्कार में सक्षम था तब तक तो 36 कौम इज्जत करती थी। महिलाओं की इज्जत,गाय और कमजोर के लिए राजपूत अपना सर कलम करवाने और युद्ध लड़ने से भी चूकते थे। लेकिन धीरे धीरे राजपूत समाज मे कुरीतियो को परोषा गया और राजपूत बुद्धि और विचारों और संस्कारों को भुलाकर खानपान और संस्कारों से गिरने लगा। शराब और मांस राजपूत समाज का मुख्य हिस्सा बनता गया और जो जातीय और लोग राजपूतो को महान समझते थे वो अब राजपूतो को अय्यास और शराबी और मांसाहारी समझने लगे। राजपूती मर्यादा का पतन होने लगा। मुगल किसी भी तरह राजपूत समाज को शराब और मांस डुबो देना चाहते थे और धीरे धीरे वही हुआ। राजपूत अपनी आन बान और शान के लिए शराब और मांस को मुख्य मानने लगा। मांस और शराब राजपूतो के घरों की शोभा में शाम...